कहना है

कई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

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RAJEEV KUMAR JHA


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कोलाज जिन्दगी के

Posted On: 2 Sep, 2013  
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एक फुटपाथी कवि का दर्द

Posted On: 30 Mar, 2013  
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गुलमुहर के गाँव

Posted On: 6 Nov, 2012  
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कौन हूँ मैं

Posted On: 8 Oct, 2012  
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चंद्रलोक के राजा(बाल कविता)

Posted On: 19 Jun, 2012  
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साज कोई छेड़ो

Posted On: 11 Jun, 2012  
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जो न मिले सुर

Posted On: 4 Jun, 2012  
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कौड़ी के मोल

Posted On: 28 May, 2012  
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कहना है तुमसे

Posted On: 22 May, 2012  
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तनहा सफ़र जिन्दगी का

Posted On: 21 Apr, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अपने घर की ओर जाते हुए दुविधा में और शायद प्रसन्नता से वह कविता को पढ़ता है तब अपने हाथों की गन्दगी को उसी कागज से पोंछ डालता है वह कागज को नीचे गिरा देता है जो फड़फड़ाते हुए फुटपाथ पर जा गिरता है तब वह किसी उत्सुक राहगीर से उठाया जाता है . ये हिंदी कवी की किस्मत है श्री झा साब लेकिन इन्हें फुट पाथ कवियों में से कल को कोई प्रेम चाँद और मैथिलि शरण भी निकल आता है ! एक आप बीती सुनाता हूँ ! मैं शायद पहली बार दिल्ली आया था , पुरी दिल्ली स्टेशन के बाहर निकल कर कहीं दूर जगह ब्रेड पकोड़ा खा रहा था ! उस व्यक्ति ने नवभारत टाइम्स अखबार की रद्दी पर रख कर दिया था वो ब्रेड पकोड़ा ! जब वो ख़त्म हो गया तो उस पर नज़र पड़ी ! हालाँकि वो कागज़ चिकन हो गया था लेकिन फिर भी पढ़ सकता था ! उसमें लिखा था , नए कवियों से "यूनिसेफ द्वारा राजीव गाँधी युवा कवि पुरस्कार " के लिए अप्रकाशित रचनायें आमंत्रित करी जाती हैं ! मैंने भी भेज दी ! और ११००० रुपये और एक मोमेंटो मिला ! ५ दिन का फाइव स्टार होटल में स्टे और दिल्ली दर्शन एक मित्र के साथ ( तब शादी नहीं हुई थी ) तो फूत्पाथिये कवि , कभी कभी मौका मार लेते हैं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख “अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड ” जिसने आपने featured ” में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है … वो पूरा का पूरा आलेख टाइप (चोरी ) किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के … सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदया ने पूरा आलेख ही चोरी का टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है … तो सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनुपमा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ ” के नाम से “तहलका ” के अंक 31may2012 में प्रकाशित है पेज 40-41 में .. चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इसे बेस्ट ब्लॉग अफ डी विक भी कर देंगे … तो जानना चाहती हूँ आपकी नजर में ये कहाँ तक उचित है .. क्या जो अपनी स्वरचित और लिखित लेख लिखते हैं क्या उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी .. तो फिर हम भी क्यों मेहनत करे … http://kg16.jagranjunction.com/2012/05/23/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

अदरणीय एवं पूजनीय सरिता जी, ‘अपनी डफली अपना राग’ ………..मुझे तो ये देख कर यक़ीन नहीं आ रहा है की आप इस तरह की बातें कर रही है………. अरे जिसका कोई मान ही नहीं है उसक मानहानि क्या होगा……अगर ऐसा है तो आपको उसी वक्त respond करना चाहिए था जब आपने लेख को पढ़ा…….आत्मवान व्यक्ति respond करता है…..तीन दिन बाद react नहीं……..और ऐसा भी क्या मान जो किसी के देने से मिलता हो और न देने से घट जाता हो….मुझे पूरा उम्मीद है कि किसी पुरुष ने उकसाया होगा आपको……चाहे वो बाहर का पुरुष हो या फिर आपके ख़ुद के भीतर का….. इस कमेंट को पढ़ने के बाद एक बात तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की आपका चित स्त्रेण बिल्कुल नहीं है…..आपकी मानसिकता पुरुषो वाली है….. इस सब के आलवे……न तो कोई स्त्री सिर्फ स्त्री होती है और न ही कोई पुरुष सिर्फ पुरुष होता है……..स्त्री पुरुष के बीच जो भेद है वो quality का नहीं है quantity का है……हरेक पुरुष के भीतर स्त्री होती और हरेक स्त्री के भीतर पुरुष होता है…….और इसी वजह से, हो सकता है की किसी का शरीर स्त्री का हो लेकिन उसका चित पुरुष का हो…… “इस महावाहियत, घटिया, निकृष्ट कोटि के लेख को खुद जे जे ने क्यूँ नहीं हटाया…” जेजे ने इसलिए नहीं हटाया क्योंकि यह महावाहियात और घटिया लेख हमारे समाज का ही हिस्सा है……ये किसी और लोक की बात नहीं है……….. आपकी जानकारी के लिए एक बात बता दें….की बिना रावण के राम का होना असंभव है…….आप तब तक ही मर्यादित हैं तब की अमर्यादित लोग समाज मैं मौजूद हैं……ये जीवन का गहरा गणित है इसे अच्छे से समझ लीजिए…….जिस दिन दुनियाँ से प्रकाश का अंत हो जाएगा उसी दिन अन्ध कार भी चला जाएगा………. ” इस लेख को तुरंत हटाने की अपील करती हूँ” क्या हटा देने से मान-सम्मन वापिस आ जाएगा…..अगर यदि आजाएगा तो इस तरह की थोथी मान सम्मान का क्या मोल……….और किसी के माने देने से आपका मान बढ़ता है………..तो समझ लीजिए देने वाला आपसे कहीं जियादा सम्मानित है………..क्योंकि देने वाला लेने वाले से हमेशा ऊपर रहेगा……..मान-सम्मान भीख माँगने की चीज़ नहीं है………ये भिखमंगापन त्यागिए………! और अंत मे यही कहूँगा….कि , ’जो सच मे ही सम्मानित व्यक्ति है उनके मान सम्मान को वो लेख पढ़ कर तनिक भी ठेस नहीं पहुँचेगा….. और जिनको पहुँचेगा वैसे table कुर्सी की कौन परवाह करता है…………मेरे भीतर के स्त्री को तो कोई ठेस नहीं पहुँचा………” (और कोई भी व्यक्ति अगर अस्तित्व के इस स्त्री और पुरुष के रहस्य को और गहरे से समझना चाहता हो…….मुझे पर्सनल मेल कर के जान सकता है………) एक और बात ज़रा मुझे बताइए….जब आब मरेंगी तो क्या आप के साथ दुनियाँ की सभी तथाकथित स्त्रियाँ मर जाएँगी……? व्यक्ति का अस्तित्व होता है…समाज का नहीं…..मैं अचंभित हूँ कि जो लोग खुद अंधविश्वास मे जी रहें है वो लोगों को क्या अंधविश्वास से बाहर निकलेंगे……????

के द्वारा: follyofawiseman follyofawiseman

मेरी सदा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक आवाज अनिल कुमार ‘अलीन’ कुत्ता, मैं या तू ?http://merisada.jagranjunction.com/2012/05/20/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%82/ sinsera के द्वारा May 22, 2012 48 घंटे से सोच रही हूँ कि इस पोस्ट को कोई “report abuse ” क्यूँ नहीं कर रहा है.? सभी प्रबुद्धजन पढ़ रहे हैं और कमेन्ट भी कर रहे हैं… मुझे कटु व कठोर भाषा कतई पसंद नहीं है लेकिन मजबूरीवश कह रही हूँ कि इस महावाहियत, घटिया, निकृष्ट कोटि के लेख को खुद जे जे ने क्यूँ नहीं हटाया….आश्चर्य है….? समाज की विकृतियों को विकृति के रूप में दिखाया जाये तो पढना बुरा नहीं है, लेकिन 2%मानसिक रोगियों के आधार पर पूरी स्त्री जाति को लेखक महाशय generalize करने की धृष्टता कैसे कर सकते हैं..? यह “x-rated” लेख पूरी स्त्री जाति का अपमान है. मैं लेखक महाशय से इस लेख को तुरंत हटाने की अपील करती हूँ …अन्यथा उनके इस घृणास्पद कृत्य के लिए उनके ऊपर मानहानि का दावा किया जा सकता है…. इस पोस्ट और मेरे कमेन्ट की कॉपी मेरे पास है….कृपया कमेन्ट डिलीट करने का निकृष्ट कृत्य न करें….

के द्वारा: sinsera sinsera

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

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के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

वैसे तो मैं मूलतः कवि नहीं हूँ, किन्तु जागरण जंक्शन के कुछ कवियों से प्रेरित हो कर कविता लिखने का प्रथम प्रयास कर रहा हूँ, कविता अगर पसंद आए तो खुले दिल से मेरी सराहना कीजिएगा ताकि मैं और भी ऐसी खूबसूरत कविताएँ लिखने के लिए प्रेरित हो सकूँ..........आपका Wise Man ! ऊपर आम का छतनार, नीचे हरे घास हज़ार, और वन-तुलसी की लताएँ करने गलबहियाँ तैयार, लेके चाकू और कटार, जब हो ओलो का प्रहार, बिमला मौसी का परिवार, चुने टोकरी मे अमियाँ फिर डाले उनका आचार... यह खेल चले दो तीन महीने लगातार.... फिर आए जाड़े का मौसम, पड़े शीत की मार, छोटू को हो जाए बुखार..... डॉक्टर की दवाई फिर करे छोटू का उद्धार..... फिर आए गर्मी की ललकार, सर्वत्र मचे हाहाकार, और जब लाइट न हो और हो पंखे की दरकार, मचाए सब चीख-पुकार, चले प्रक्रिया यह बारंबार, फिर आए बसंती बहार, इस मौसम के बारे में मैं कहूँगा अगली बार...... तब तक के लिए मेरा सादर नमस्कार.....

के द्वारा: follyofawiseman follyofawiseman

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

कौओं के इस तरह मारे जाने की कई वजहें हो सकती हैं.खेतों में अधिक फसल उपजाने के लोभ में किसान अधिक उर्वरक व् कीटनाशक का प्रयोग कर रहे हैं.यह जहर का काम करता है.इसके कारण पानी भी विषैला हो जाता है.मौसम चक्र में अप्रत्याशित बदलाव से भी कई पक्षी आँगन में नहीं दिखाई देते.तालाबों,पोखरों,जलाशयों में पानी का न होना भी कौओं के मौत का बड़ा कारण है.घरों में चूहों को मारने वाली दवाई के कारण मरे चूहों को लोग जहाँ-तहाँ फ़ेंक देते हैं.इस तरह के जहर खाकर मरे चूहों को खाकर भी कौए मर रहे हैं.ऐसे में बर्ड फ़्लू होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता. कृषको को कई वर्षों से intigrated pest management ki jaankaari di ja rahi hai ve apna laalach to choden. यादों को ताजा और आज की स्थिति को दर्शाता सुन्दर लेख. badhai. कौआ बगुला भगत बन गए हैं तादाद इनकी कम नहीं, संख्या इनकी भारी अभी तो ये गाँव गाँव में हैं उड़ने की तैयारी

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी , मेरी ख़ामोशी का बे वजह वो ताना देंगे दोनों महान हस्तियों ( शशि जी एवं राजीव जी ) क्या बच्चे की जान लोगे. धरती पर आये तो दांत नहीं इस उम्र मैं भी दांत नहीं, अब क्या उम्र है मेरी..? नहीं बोलता तो कहा गया लिखो भाई ऐसे काम नहीं चलेगा , राजीव भाई की व्यथा देखी नहीं गयी. ११ बार चश्मा लगा , उतार राजीव जी की उम्र देखी. फिर १०० मैं से घटा कर देखा सो दवा बताई. मैं तो बुरे चक्कर मैं फंस गया भाई. इधर (शशि जी ) उधर (राजीव जी) , मैं किधर जाऊं भाई. आदरणीय राजकमल जी से फैसला कराओ भाई. क्षमा... फाल्गुन की बयार आ रही है , बचेंगे कोई भी नहीं, बाबा हों या ताई आप लोगों ने मिलकर अछि क्लास लगे. अब नहीं लिखेंगे, माफ़ी दे दो गुरुं की नाइ. त्राहि माम... राजकमल महोदय रक्षा...?

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

हमे पाकिस्तानीयों से या तो हद दर्जे की नफरत होती है या फिर बेफिजूल का बिना दिल विल का प्यार व्यार .... जब मुशरफ समझौते के लिए हमारे यहाँ पधारा था तब उसको भी मिडिया ने सर आँखों पर बिठाया था ..... इसलिए मिडिया को कम से कम हिना के नारी होने के कारण तवज्जों देने का आरोप नहीं लगा सकते ..... बाकि उस दस लाख का बैग इस्तेमाल करने वाली हसीना को कफन कितने हजार का नसीब होगा यह तो वक्त ही बतलायेगा ....... अच्छा और मनोरंजक लेख :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

राजिव सर, सादर प्रणाम दुर्भाग्य मेरा की मैं बिहार में रहते हुए भी "रेनू" जी के बारे में ज्यादा नहीं जानता किन्तु कोसी के बारे में अवस्य जानता भी हूँ और समझता भी हूँ आपने एक ऐसा लेख उठाया है जो अपने आप में एक प्रश्न छोड़ देता है की क्या वास्तव में कभी उस क्षेत्र का विकाश हो भी सकेगा या बह यंही वो हर साल दंश झेलता रहेगा ............................. ये तो भगवान् का भला हो की इस वर्ष वहाँ ज्यादा तबाही नहीं देखने को मिली .................हम पूर्ण रूप से सरकार को भी इसका दोष नहीं दे सकतें क्यूंकि नेपाल से आने वाला पानी उसका मुख्य कारण है ..........खैर जो भी हो आप अनुभवी है और आपकी लेख भी अनुभवी है ...............बस एक बात पूछना चाहूँगा की आप किस कहानी के पात्रों को बता रहें थें यदि मुझे बताने की कृपा करें तो मैं भी पढ़ना चाहूँगा आपका प्रिय

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN

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के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

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