RAJEEV KUMAR JHA

कहना है

कई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

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तनहा सफ़र जिन्दगी का

Posted On: 21 Apr, 2012 में

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Tanha1

    तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल का
    चंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल पर
    मौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगी
    हंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर


फिर कहाँ मिलेंगे मरने के बाद हम
सोचते ही रहे सब इस सवाल पर
खुशबुओं की राह से एक दिन गुजर गया
कहाँ से आ गई ये राह दीवाल पर

    शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे
    दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर
    आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर
    बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर


तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है
दिखे है लहरा चांद नदी के दर्पण पर
और भी छलक जाती हैं निगाह मिलाकर
हश्र तो ये है तुमसे मुलाकात पर

    जिसे देखकर बढ़ी जाती है प्यास हर पल
    हाल तो ये है लगी झड़ी बरसात पर
    जरा गौर फरमाईए ‘राजीव’ की इस बात पर
    उस चांदनी रात का जिक्र क्यों न हो इस ख्याल पर

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54 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
May 26, 2012

शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर श्री राजीव कुमार झा जी , सादर ! नमस्कार एक ताज़गी सी होती है आपकी रचनाओं में , न कोई कठिन शब्द , न ज्यादा दिमाग की जरूरत ! बहुत ही सरल शब्दों में बहुत बढ़िया रचना लिख देते हैं आप !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    May 27, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! योगी जी.सराहना के लिए आपका आभार.

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 21, 2012

:-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    May 22, 2012

    बहुत खूब! राजकमल जी.

yamunapathak के द्वारा
April 25, 2012

बहुत खूब सर

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 26, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! यमुना जी.सराहना के लिए दिल से आभार.

minujha के द्वारा
April 24, 2012

तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल का चंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल पर मौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगी हंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर बहुत खूबसूरत जज़्बात राजीव जी

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 25, 2012

    धन्यवाद! मीनू जी.सराहना के लिए आभार.

shashibhushan1959 के द्वारा
April 23, 2012

आदरणीय झा जी, सादर ! क्या बात है ! बहुत सुन्दर !! कोमलता, निर्मलता, सुन्दरता और दर्द —- एक साथ ! बेहतरीन रचना !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 24, 2012

    धन्यवाद! आदरणीय शशि जी,सराहना के लिए आभार.

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 22, 2012

“तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है दिखे है लहरा चांद नदी के दर्पण पर” आपकी रचना दिखने में सरल होते हुए भी सरल नहीं है मुझ कमअक्ल को दो बार पढ़ना पड़ता है भावों की गहराई तक पहुँच पाने के लिए इससे ज्यादा तारीफ कहीं शुगर न कर दे आपको :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! आदरणीय राजकमल जी.आप भावों की गहराई तक बिलकुल पहुँच गए हैं.सराहना के लिए आभार.वैसे शूगर की बीमारी का शर्तिया इलाज अपने निर्मल बाबा के पास है.काली भैंस के काले दूध में पकी, आधा किलो चीनी मिलाकर खीर खाने से शूगर यूं उड़न छू हो जाता है जैसे नेताओं के किये गए वायदे.

nishant के द्वारा
April 22, 2012

kya khub kaha hai wanh wwah

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! निशांत जी.ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आभार.

krishnashri के द्वारा
April 22, 2012

आदरणीय झा जी नमस्कार , बहुत सुन्दर भाव एवं प्रकृति चित्रण , शब्दों का सुन्दर संयोजन . बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! आदरणीय कृष्णश्री जी.ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आभार.

omdikshit के द्वारा
April 22, 2012

झा जी, नमस्कार. बहुत ही भाव-प्रधान पंक्तियाँ.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! ओम जी.सराहना के लिए आभार.

follyofawiseman के द्वारा
April 22, 2012

पढ़ तो लिया मैंने हिम्मत करके…..पर प्रतिक्रिया देना मुश्किल लग रहा है…..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! संदीप जी.आप हमारे ब्लॉग पर आये,पढ़ा,हमें बहुत अच्छा लगा.

div81 के द्वारा
April 22, 2012

बहुत खूबसूरत रचना …………….. बधाई राजीव जी

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    ब्लॉग पर आपका स्वागत है,दिव्या जी.आप हमारे ब्लॉग पर आईं,बहुत अच्छा लगा.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया एवं सराहना के लिए आभार.

alkargupta1 के द्वारा
April 22, 2012

अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति राजीव जी !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! आदरणीया अलका जी.सराहना के लिए आभार.

jlsingh के द्वारा
April 22, 2012

आदरणीय झाजी, नमस्कार! बहुत ही सुन्दर रचना पेश की आपने! जिसे देखकर बढ़ी जाती है प्यास हर पल हाल तो ये है लगी झड़ी बरसात पर जरा गौर फरमाईए ‘राजीव’ की इस बात पर उस चांदनी रात का जिक्र क्यों न हो इस ख्याल पर… वाह! अति सुन्दर!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद!आदरणीय जवाहर जी.ये तो आपका बड़प्पन एवं स्नेह है,वरना कहाँ हम इतना काबिल थे.सराहना के लिए आभार.

sinsera के द्वारा
April 22, 2012

राजीव जी नमस्कार, बहुत उम्दा ख़यालात.. मौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगी हंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर….. लीजिये बादलों पर एक और ज़िम्मेदारी आ गयी ………….

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! सरिता जी. आपके ही शब्दों को उधार लेकर आगे बढ़ाया है.आपने बादलों से बहुत अच्छी उपमा दी है,सोचा,थोड़ा प्रयास हम भी करें. सराहना के लिए आभार.

rekhafbd के द्वारा
April 21, 2012

आदरणीय राजीव जी ,अति सुंदर अभिव्यक्ति ,”तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है ,दिखे है लहरा चाँद नदी के दर्पण पर ” बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! रेखा जी. सराहना के लिए आभार.

nishamittal के द्वारा
April 21, 2012

सुन्दर भाव,सुन्दर प्रस्तुतीकरण ,राजीव जी सुन्दर पंक्तियाँ शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद,आदरणीया निशा जी. आपकी सराहना पाकर अच्छा लगा.

akraktale के द्वारा
April 21, 2012

राजीव जी सादर नमस्कार, शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर वाह! क्या रास्ते तलाशे हैं ख्यालों के, कोई दीवाल नहीं है राह में. बहुत सुन्दर. बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद,आदरणीय अशोक जी.इन उपमाओं की, जीवन के विविध रंगों से तुलना मन को भाई,जानकर सुकून महसूस हुआ.सराहना के लिए तहे दिल से आभार.

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 21, 2012

आदरणीय राजीव सर, सादर प्रणाम आज आप भी पुरे रुबाब में लग रहें है सर……………. आपने चाँद को बहरा भी बना दिया और फिर लहरा भी दिया ………..मजा आ गया सुन्दर शब्दों से सजी हुई …..खट्टी – मीठी स्वादों की अनुभूति कराती आपकी यह रचना…………..बहोत सुन्दर

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    प्रिय आनंद जी, धन्यवाद !आप रचनाओं पर बहुत बारीक नज़र रखते हैं.दरअसल,चाँद,तारे,नदी,बादल,प्रकृति हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं.सो उपमा करते वक्त,यही याद आते हैं.सराहना के लिए बहुत आभार.

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 21, 2012

आदरणीय झा साहब नमस्कार, तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल का चंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल पर शानदार प्रस्तुति………

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! अजय जी.सराहना के लिए आभार.

चन्दन राय के द्वारा
April 21, 2012

झा साहब , हमारी जवान उमंगें इठलाने लगी हैं, आपके इस बसंती प्रेम उन्माद पर , फिर से कोपल फूटेगी प्रेम की ह्रदय में , जब प्रियतम नयन आ टिकेंगे मेरे श्रंगार पर वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! चन्दन जी.आप सभी युवा कवियों की इतनी अच्छी रचनाएं इस मंच पर हैं कि मेरा तो यह तुच्छ प्रयास है.रचना पसंद आने एवं सराहना के लिए आभार.

के द्वारा
April 21, 2012

तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल का चंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल पर मौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगी हंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर good lines…rajeev ji

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! मित्र.आप अपना परिचय देते तो और भी अच्छा लगता.सराहना के लिए आभार.

yamunapathak के द्वारा
April 21, 2012

वाह!!!!!!!!!!! सर बहुत अच्छी पंक्तियाँ

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! यमुना जी.आप मेरे ब्लॉग पर आईं,इतना ही काफी है.सराहना के लिए आभार.

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 21, 2012

फिर कहाँ मिलेंगे मरने के बाद हम सोचते ही रहे सब इस सवाल पर खुशबुओं की राह से एक दिन गुजर गया कहाँ से आ गई ये राह दीवाल पर आदरणीय राजीव सर ..नमस्कार बहुत ही खुबसूरत रचना …बधाई आपको

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! महिमा जी.सबसे पहले तो इस बात की बधाई ! आपको कि, आपका सुन्दर चित्र ब्लॉग पर लग गया.आप सबों की इतनी सुन्दर रचनाओं को इस मंच पर पढ़ा है कि यह तो काफी छोटा प्रयास है. सराहना के लिए आभार.

vikramjitsingh के द्वारा
April 21, 2012

राजीव जी, सादर प्रणाम, चांदनी रात का ज़िक्र किये बिना तो ये रचना अधूरी लगेगी……प्रभु इजाजत हो तो कुछ हम कोशिश करें……… ”चांदनी रात में वो खड़े हैं दुपट्टा तान कर… शर्बत-ए-दीदार पिलायेंगे क्या छान कर…….”

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! विक्रम जी.बहुत खूब.आपके तरकश के इन्हीं तीरों को तो प्रतीक्षा रहती है हमें. सराहना के लिए आभार.

dineshaastik के द्वारा
April 21, 2012

फिर कहाँ मिलेंगे मरने के बाद हम सोचते ही रहे सब इस सवाल पर बेहद खूबसूरत पंक्ति…बधाई…

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    आदरणीय दिनेश जी,धन्यवाद! सराहना के लिए आभार.

April 21, 2012

फिर कहा मिलेंगे मरने के बाद हम सोचते ही रहे सब इस सवाल पर…………………………….सादर प्रणाम!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! अनिल जी.सराहना के लिए आभार

कुमार गौरव के द्वारा
April 21, 2012

राजीव जी सादर प्रणाम बहुत अच्छी रचना, बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    April 22, 2012

    धन्यवाद! गौरव जी.इस पोस्ट पर पहली प्रतिक्रिया के लिए आभार.आपकी सराहना मिली,अच्छा लगा.


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