कहना है

कई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

36 Posts

1257 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7781 postid : 306

साज कोई छेड़ो

Posted On: 11 Jun, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend


साज कोई छेड़ो
गीत नया गाने दो
बहुत तनहा है ये दिल
आज उसे बह जाने दो

प्यार की ये नजर
अब इधर मोड़ दो
बंधा जिससे मैं
युगों युगों से हूँ
किस तरह प्रीत का
वो डोर न तोड़ दो

इक नशा था
वो वक़्त भी था
मेरे घर का
तुम पर तारी था

जा रहे हो
ये भी वक्त है
मेरी गली से
नजरें चुरा के

ये अहसास न होता
गर तेरी जुदाई का
तुमसे प्यार न होता
इस कदर बेइंतिहा

आज फिर कोई माहताब
रोशन हुआ है
चिलमन की ओट से
उसने नकाब उल्टा है

बहती है उसके जिस्म से
खुशबू की इक नदी
लगता है कहीं फिर
खिल गए ताजा गुलाब फिर

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (12 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

38 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoranjanthakur के द्वारा
October 2, 2012

shri rajeev bhai bich me manch se me anupastith tha aaj aapka link mila ………….. bahut badhai … saadar

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 5, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! मनोरंजन जी.सराहना के लिए आभार.

yamunapathak के द्वारा
June 18, 2012

राजीवजी तस्वीर के साथ आपकी यह kavitaa बहुत प्यारी बनी है.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 19, 2012

    यमुना जी,सादर अभिवादन.कविता एवं तस्वीर की सराहना के लिए आपका आभार.

मनु (tosi) के द्वारा
June 18, 2012

आदरणीय राजीव जी , सादर !!! बेहतरीन रचना … बधाई !!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 19, 2012

    धन्यवाद ! मनु जी.सराहना के लिए आपका आभार.

roshni के द्वारा
June 17, 2012

राजीव जी नमस्कार बहुत सुंदर रचना बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 19, 2012

    रौशनी जी,धन्यवाद ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया एवं सराहना के लिए आभार.उम्मीद है आगे भी आपकी प्रतिक्रियाएं मिलेंगी.

allrounder के द्वारा
June 16, 2012

बहुत खूब राजीव जी, बहुत ही सुन्दर साज छेड़ा आपने आगे भी ये लय बनाए रखे इन्ही शुभकामनाओं सहित …..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 17, 2012

    सचिन जी,नमस्कार.सराहना के लिए आपका आभार.

sinsera के द्वारा
June 13, 2012

सुकूत -ए -शाम मिटाओ बहुत अँधेरा है , सुख़न की शम्मा जलाओ बहुत अँधेरा है ….. बहुत खूब राजीव जी….बहुत अच्छी ग़ज़ल..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 15, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद सरिता जी. सराहना के लिए आपका आभार.आप सबों की दिल को छू लेने वाली कविताओं एवं गजलों से कुछ लिखने की प्रेरणा मिलती है.

'राही अंजान' के द्वारा
June 13, 2012

आज फिर कोई माहताब रोशन हुआ है चिलमन की ओट से उसने नकाब उल्टा है !! . बहुत ही खूबसूरत एहसास लिए हुए सुंदर पंक्तियाँ आदरणीय राजीव जी ! :)

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 15, 2012

    धन्यवाद ! राही अंजान जी.कविता की पंक्तियों की सराहना के लिए आपका आभार.

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
June 13, 2012

राजीव जी , अहां क कविता बड्ड नीक लागल | बड्ड नीक लिखने छी अहां |

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 15, 2012

    अहांक धन्यवाद ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है,विवेक जी.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया एवं सराहना के लिए आभार.

yogi sarswat के द्वारा
June 13, 2012

आज फिर कोई माहताब रोशन हुआ है चिलमन की ओट से उसने नकाब उल्टा है आदरणीय राजीव कुमार झा जी ,सादर नमस्कार ! चित्र से लेकर शब्दों तक बस मधुर धुन सुने पड़ रही है ! बहुत सुन्दर !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 15, 2012

    आदरणीय योगी जी,सादर. कविता की पंक्तियों एवं चित्र की सराहना के लिए आपका आभार.

minujha के द्वारा
June 13, 2012

राजीव जी नमस्कार आपने जो साज छेङा है उसकी मधुर तान हम तक ज्यों कि त्यों पहुंच  गई है,बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 15, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! मीनू जी.सराहना के लिए आभार.

June 12, 2012

सादर प्रणाम! साज कोई छेड़ो गीत नया गाने दो अब हमें मुस्कुराने दो.. जो दर्द होठो से नहीं निकल सके, आज उसे आखों से बह जाने दो………..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    अनिल जी,नमस्कार.सराहना के लिए आभार. जो दर्द होठों से न निकल सके आज उसे आँखों से बह जाने दो बहुत सुन्दर.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 12, 2012

प्यार का फ़साना बने दिल दीवाना कुछ तुम कहो कुछ हम कहें बधाई, आदरणीय राजीव जी, सादर वो भूली दास्ताँ लो फिर याद आ गयी

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी,सादर.सराहना के लिए आभार. प्यार का फ़साना,बने दिल दीवाना कुछ तुम कहो कुछ हम कहें बहुत सुन्दर.

akraktale के द्वारा
June 12, 2012

आदरणीय राजीव जी सादर, प्यार की ये नजर अब इधर मोड़ दो बंधा जिससे मैं युगों युगों से हूँ किस तरह प्रीत का वो डोर न तोड़ दो तन्हाई में निकल आयी यादों की बरात और ख़ामोशी बोलने लगी है. बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय अशोक जी,सादर.रचना को परखने एवं सराहना के लिए आपका आभार. बहुत सुन्दर कहा है आपने….. तन्हाई में निकल आई यादों की बारात और खामोशी बोलने लगी है बहुत खूब.

anoop pandey के द्वारा
June 12, 2012

राजिव जी सुन्दर कृति, बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! अनूप जी.सराहना के लिए आभार.

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 11, 2012

आदरणीय राजीव जी ….. सादर अभिवादन ! इक नशा था वो वक़्त भी था मेरे घर का तुम पर तारी था किरपा करके इन लाइनों का अर्थ स्पष्ट कीजियेगा + क्या यह सीसी तरह से ही लिखी जानी चाहिए थी ?…. आप तराने यूँ ही गुनगुनाते रहे मस्ती से सरोबार होकर लेकिन जरा बचके क्योंकि हमने तो सुना है की बड़ी नखरे वाली होती है यह बुर्केवालिया शुभकामनाये :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P जय श्री कृष्ण जी

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय राजकमल जी,सादर.आपने तो कविता को बहुत गहराई से परखा है.लिखते वक्त मुझे भी इसका गूढ़ अर्थ पता नहीं था.आपने तो सोचने पर विवश कर दिया.ढेर सारे बल्बों एवं कविता की सराहना के लिए आभार. जय श्रीकृष्ण जी.

चन्दन राय के द्वारा
June 11, 2012

झा जी , आहान एतेक निक लिखले छि ने की कहू , देखिये जो भी अल्प ज्ञान अपने मित्र से सिखा आपकी प्रशंशा में लिख दिया , श्रृंगार और प्रेमरस में डूबी आपकी कविता मनमोहक है

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    अहाँक धन्यवाद ! चंदनजी. मुझे तो आप सबों से ही लिखने की प्रेरणा मिलती है.सराहना के लिए आभार.

Mohinder Kumar के द्वारा
June 11, 2012

झा जी, मुहब्बत और तन्हाई के रंग में रची सुन्दर रचना के लिये बधाई.. मगर. “मुहब्बत एक खुश्बू है हमेशा साथ चलती है तन्हाई में भी कोई इंसा कभी तन्हा नहीं होता”

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी,सादर.आपने तो कविता से भी सुन्दर प्रतिक्रिया दी है. तन्हाई में भी कोई इन्सान तन्हा नहीं होता बहुत खूब. सराहना के लिए आपका आभार.

dineshaastik के द्वारा
June 11, 2012

बहती है उसके जिस्म से खुशबू की इक नदी लगता है कहीं फिर खिल गए ताजा गुलाब फिर राजीव जी बहुत सन्दर,  सौन्दर्य  का प्रकृतिकरण…….

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय दिनेश जी,सादर.सराहना के लिए आभार.

vikramjitsingh के द्वारा
June 11, 2012

आदरणीय राजीव जी….सादर नमस्कार…. ”छेड़ा मेरे दिल ने….तराना तेरे प्यार का….. जिस ने सुना खो गया……पूरा नशा हो गया……” ”अपनी हद से ना गुज़रे कोई इश्क में….. जिसको भी जो मिला है….मिला है नसीब से….”

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 13, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद विक्रम जी,आपकी त्वरित एवं खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए.सराहना के लिए आपका आभार.


topic of the week



latest from jagran