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चंद्रलोक के राजा(बाल कविता)

Posted On: 19 Jun, 2012 में

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यह कविता इस मंच के नन्हें मुन्हें पाठकों के लिए.बरसों पहले लिखी यह कविता अब तक कहीं प्रकाशित नहीं हो पाई.

th_moon-boy[1]
चंदामामा चंद्रलोक के नहीं रहे क्यों राजा
रूस अमेरिका वाले अब हैं वहां बजाते बाजा

मम्मी मामी कहाँ गई जो थीं सुन्दर पटरानी
मंगल ग्रह को चली गई क्यों नानी भरने पानी

मौसी क्यों न मिठाई भेजे जाकर वहां झगड़ते
पप्पा जी से पूछो जो नित अख़बारों को हैं पढ़ते

दो अम्मा सन्देश चलूँगा डैडी की ससुराल
तेरे पीहर पकें पकौड़े खाकर बनूँ निहाल

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Cyelii के द्वारा
July 11, 2016

I looks like Texas became some kind of headquarter that tightens the Israeli-US bonds. Rick Perry is another Texan ,pro-Israeli &#22d0;presi8ent in making.He is such a weasel that I cann’t even look at him, let along listen to him.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 4, 2012

……………. प्रिय राजीव जी हम तो बच्चे हैं इस कविता से अभी तक दूर रहा अब पढ़ मन खुश हो गया सुन्दर कल्पना पहले और अब की तुलना अब भगवान् भी सोने को नहीं पाते कहाँ सोयें सब के दिल देख देख लौट जाते हैं ,, आभार भ्रमर ५

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी,सादर.कल्पना की उड़ान अच्छी लगी,यह जान कर बहुत खुशी मिली.हर व्यक्ति के मन में एक बालमन छुपा होता है जो यदा-कदा बाहर आ जाता है. ऎसी ही एक बाल सुलभ जिज्ञासा है कविता के रूप में.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 4, 2012

प्रिय राजीव जी हम तो बच्चे हैं इस कविता से अभी तक दूर रहा अब पढ़ मन खुश हो गया सुन्दर कल्पना पहले और अब की तुलना अब भगवान् भी सोने को नहीं पाते कहाँ सोयें सब के दिल देख देख लौट जाते हैं ,, आभार भ्रमर ५

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 25, 2012

आदरणीय राजीव कुमार झा जी, सादर अभिवादन !…..बाल- मनोविज्ञान पर आधारित अत्युत्तम प्रस्तुति ! तदर्थ हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    August 28, 2012

    धन्यवाद! आचार्य विजय जी.सराहना के लिए आभार.

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय राजिव सर, सादर प्रणाम बहुत ही सुन्दर और मनमोहक कविता सर बच्चा ना होते हुए भी आनंद आ गया ………..आप यूँही लिखते रहें सर

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    August 28, 2012

    प्रिय आनंद जी,सराहना के लिए आभार.काफी वक्त से कार्य संबंधी व्यस्तता के कारण इस मंच से दूर था,उम्मीद है,शीघ्र वापसी होगी.

minujha के द्वारा
June 21, 2012

बहुत सरल और सुंदर बाल कविता राजीव जी बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! मीनू जी.बाल कविता की सराहना के लिए आभार.

June 21, 2012

सादर प्रणाम! क्या खूब लिखा है……………आपने………………….. चंदामामा चंद्रलोक के नहीं रहे क्यों राजा रूस अमेरिका वाले अब हैं वहां बजाते बाजा मम्मी मामी कहाँ गई जो थीं सुन्दर पटरानी मंगल ग्रह को चली गई क्यों नानी भरने पानी मौसी क्यों न मिठाई भेजे जाकर वहां झगड़ते पप्पा जी से पूछो जो नित अख़बारों को हैं पढ़ते दो अम्मा सन्देश चलूँगा डैडी की ससुराल तेरे पीहर पकें पकौड़े खाकर बनूँ निहाल……………….वह..वह….सुन्दर और कोमल अभिव्यक्ति के साथ आने वाले सच को उजागर करती रचना……………….

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    अनिल जी,सादर नमस्कार.बाल कविता की सराहना के लिए आभार.

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 20, 2012

बहुत -२ मुबाल्कबाद हमको बहुत ही अच्छी लगी यह प्याली -२ कविता

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय राजकमल जी,सादर.आपका यह रूप भी अच्छा लगा.बच्चे बनकर बाल कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

allrounder के द्वारा
June 20, 2012

नमस्कार राजीव जी, बच्चों के लिए एक अच्छी रचना मंच पर प्रस्तुत करने के लिए बधाई !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! सचिन जी.बाल कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

vikramjitsingh के द्वारा
June 20, 2012

जब मैं छोटा बच्चा था…. बड़ी शरारत करता था….. (आगे नहीं आता..) धन्यवाद राजीव जी……सुंदर बाल कविता…

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद ! विक्रम जी. कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

vikramjitsingh के द्वारा
June 20, 2012

जब मैं छोटा बच्चा था…. बड़ी शरारत करता था….. (आगे नहीं आता..) धन्यवाद राजीव जी……सुंदर बाल कविता…..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    विक्रम जी,सादर नमस्कार. बाल कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

yogi sarswat के द्वारा
June 20, 2012

श्री राजीव कुमार झा जी सादर नमस्कार , आपके लेखन का नया रूप देखने को मिला ! बहुत सुन्दर बाल कविता !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    योगी जी,सादर नमस्कार. बाल रचना की सराहना के लिए आपका आभार.

alkargupta1 के द्वारा
June 20, 2012

राजीव जी, अति सुन्दर बाल रचना !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीया अलका जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

Mohinder Kumar के द्वारा
June 20, 2012

राजीव जी मनभावन बाल रचना के लिये बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आपका आभार.

jlsingh के द्वारा
June 20, 2012

राजीव झा जी, सादर अभिवादन! सुन्दर बाल कविता. बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय जवाहर जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आभार.

dineshaastik के द्वारा
June 20, 2012

बहुत ही खूबसूरत बाल कविता……

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय दिनेश जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आभार.

चन्दन राय के द्वारा
June 20, 2012

झा साहब , चंदामामा चंद्रलोक के नहीं रहे क्यों राजा रूस अमेरिका वाले अब हैं वहां बजाते बाजा वाह ! वाह ! मन को गुदगुदाती रचना !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    चन्दन जी,धन्यवाद. सराहना के लिए आभार.

akraktale के द्वारा
June 19, 2012

राजीव जी सादर, सुन्दर बाल कविता. बधाई.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय अशोक जी,सादर. सराहना के लिए आभार.

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
June 19, 2012

सुन्दर बाल कविता , राजीव जी |

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! विवेक जी.कविता की सराहना के लिए आभार.

yamunapathak के द्वारा
June 19, 2012

बच्चों की मासूमियत और भोलेपन से परिपूर्ण कविता.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    यमुना जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आभार.

Rajni Thakur के द्वारा
June 19, 2012

बेहतर बाल कविता…

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    रजनी जी,ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया एवं सराहना के लिए आभार.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 19, 2012

आदरणीय राजिव जी , सादर आपकी व्यथा सही बाल साहित्य दुर्दशा भई आपकी कविता नयी मुनिया आनंदित हुई बधाई ताजी नयी

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी,सादर.कविता की सराहना के लिए आपका आभार.


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