कहना है

कई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

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कौन हूँ मैं

Posted On: 8 Oct, 2012 में

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कौन हूँ मैं

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,

एक झूठ है आधा सच्चा सा .

जजबात को ढके एक पर्दा बस ,

एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .


जीवन का एक ऐसा साथी है ,

जो दूर न हो के पास नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


हवा का एक सुहाना झोंका है ,

कभी नाज़ुक तो कभी तूफानों सा .

शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,

कभी अपना तो कभी बेगानों सा .


जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,

जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,

यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .

यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,

पर कभी – कभी आँखों को नम कर जाता है .


यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,

पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ………

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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaylen के द्वारा
July 11, 2016

ME ENCANTA LEER TODOS LOS ARTICULOS QUE PUBLICAN, SON MUY BUENOS, ACTUALMENTE ME DESEMPEÑO COMO DOCENTE DE MATERNAL Y ESTUDIO OCTAVO SEMESTRE DE EDUCACION ESP0ICAL&#823E;. PERO MABEL LAMENTABLEMENTE NO ME HAN VUELTO A MANDAR MAS INFORMACION Y ME SIENTO MUY TRISTE Y PREOCUPADA POR ESO, IMAGINO QUE QUIZAS ES POR LA CARGA DE TRABAJO QUE TIENEN….

October 30, 2012

राजीव जी बहुत ही अच्छी सार्थक प्रस्तुति बधाई ,,,,,,,,एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है , यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है . यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं , पर कभी – कभी आँखों को नम कर जाता है

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 31, 2012

    धन्यवाद! हिमांशु जी.सराहना के लिए आभार.

MAHIMA SHREE के द्वारा
October 17, 2012

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं , तुम कह देना कोई ख़ास नहीं . एक दोस्त है कच्चा पक्का सा , एक झूठ है आधा सच्चा सा . जजबात को ढके एक पर्दा बस , एक बहाना है अच्छा अच्छा सा…. आदरणीय राजीव सर , नमस्कार .. नवरात्र की शुभकामनाये … बहुत ही सहज और सुंदर अभिवयक्ति .. आपकी रचनाये हमेशा बड़ी सहजता और सरलता से अपनी बात कह जाती हैं .. मेरी बधाई स्वीकार करें

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 23, 2012

    धन्यवाद ! महिमा जी.सराहना के लिए आभार.

yamunapathak के द्वारा
October 13, 2012

राजीव जी आपकी यह कविता आज के उहापोह की ज़िंदगी पुरी भावना के साथ बखूबी बयान कर रही है

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 14, 2012

    आदरणीय यमुना जी,सादर.सराहना के लिए आभार.

Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय राजीव जी, आपकी पंक्तियों में बहुत गहराई है, जीवन का असली मर्म है इस कविता में, बहुत सुन्दर रचना कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं , तुम कह देना कोई ख़ास नहीं . एक दोस्त है कच्चा पक्का सा , एक झूठ है आधा सच्चा सा .

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 13, 2012

    आदरणीय अनिल जी,सादर.ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया एवं सराहना के लिए आभार.

yogi sarswat के द्वारा
October 12, 2012

हवा का एक सुहाना झोंका है , कभी नाज़ुक तो कभी तूफानों सा . शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले , कभी अपना तो कभी बेगानों सा . बहुत खूब ! सुन्दर शब्द राजीव कुमार झा जी !

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 13, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद ! योगी जी.सराहना के लिए आभार.

ashishgonda के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय! सादर प्रणाम, किसी के पूंछने का इंतजार नहीं है, क्योंकि “कोई खास नहीं” नहीं बहुत खास की बात है, आशा है मेरा मनतव्य समझ रहे हैं… कृपया मेरी रचना “एक अधूरी प्रेम-कथा” के लिए समय निकाले- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/10/08/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    धन्यवाद ! आशीष जी. ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आभार.मैंने आपकी रचना पढ़ी है एवं प्रतिक्रिया भी दी है.

alkargupta1 के द्वारा
October 11, 2012

राजीव जी , अति सुन्दर रचना

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीया अलका जी,सराहना के लिए आभार.

manoranjanthakur के द्वारा
October 11, 2012

पर हम कहेंगे बहुत खास … बहुत बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    धन्यवाद ! आदरणीय मनोरंजन जी. आपकी खास प्रतिक्रिया के लिए आभार.आपका स्नेह यूं ही बना रहे.

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
October 11, 2012

ऐसी क्या बात है राजीव भाई देर से मिलेंगे तो क्या भूल जायेंगे …..मै कौन हूँ ….जय श्री राधे अच्छे अहसास , सुन्दर भाव जिन्दगी की गाथा समझाती हुयी अच्छी रचना …. यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है , पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं . कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं , तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ……… भ्रमर ५

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी,सादर. आपने तो निरुत्तर कर दिया.सराहना के लिए आभार.देखिये न आप भूले कहाँ हैं ?

santosh kumar के द्वारा
October 10, 2012

श्रधेय सर ,.सादर प्रणाम बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढ़कर अच्छा लगा ,..बहुत शिकायती अंदाज है ,.. अपना बेगाना कैसे हो सकता है ,..(जो दूर हो के पास नहीं .)..यह लाइन नहीं समझ आई ,…संभवतः आपने दूर न हो के पास नहीं लिखा होगा ,..सादर बधाई

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय संतोष जी,सादर.सराहना के लिए आभार.आपने यकीनन बहुत बारीकी से परखा है,कविता को. आपका कहना सही है कि ‘जो दूर न हो के पास नहीं’ बेहतर होगा.

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय राजीव सर, सादर प्रणाम अभी अभी आपकी यह रचना देखि सर ………….. बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढ़ काफी सुन्दर लगा ……..पुनः आपकी मिठास से भरी कविता काफी कुछ कह भी रही है और छुपा भी रही है…………….पर जो ख़ास है उसे तो ख़ास कहना ही होगा सुन्दर कविता के लिए बधाई सर

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 11, 2012

    प्रिय आनंद जी,सराहना के लिए आभार.वस्तुतः आप सभी से बहुत कुछ सीखने को मिला है.

shashibhushan1959 के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय राजीव जी, सादर ! आपने तो इस रचना में दिल ही खोल कर रख दिया है ! शिकायत भी की तो कितने नाजो-अदा से ! “”कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं , तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ………”" वाह भई वाह ! बहुत सुन्दर अंदाज ! बधाई ! (लेकिन यह शिकायत वास्तविक है क्या ?) हा…. हा…… हा……!!!!!!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    आदरणीय शशि जी,सादर.सराहना एवं आपके आशीर्वाद के लिए आभार. कविता एवं शिकायत सिर्फ कल्पना की उपज हैं.लेकिन आपकी प्रतिक्रिया से इसकी खूबसूरती और बढ़ गई.

akraktale के द्वारा
October 9, 2012

हरदम यादों में समाये रहता है, और सबसे दिल के पास वही, फिरभी, कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं , तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ………  सुन्दर रचना के लिए सादर बधाई स्वीकारें आदरणीय राजीव जी.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद !आदरणीय अशोक जी.काव्यात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 8, 2012

आदरणीय राजीव जी , साविवादन !…रंगीन अक्षरों में मुद्रित बड़ी ही हसीन काव्य- रचना की प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार ! अंतराल बाद आप दिखे | पुनश्च !!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    आदरणीय आचार्य विजय जी,सादर अभिवादन.इस मंच के कुछ उम्दा रचनाकारों से ही कविताओं में रंग भरना सीखा है.सराहना के लिए आभार.कुछ व्यस्तताओं के कारण मंच से दूरी बन गई थी.

'राही अंजान' के द्वारा
October 8, 2012

आदरणीय राजीव जी, बहुत ही खूबसूरत कृति !! बार-बार पढ़ने को मन करता है । अत्यंत सुंदर…. :)

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    नमस्कार एवं धन्यवाद! संदीप जी.सराहना के लिए आभार.आप जैसे उम्दा रचनाकारों से काफी कुछ सीखने को मिला है.

    'राही अंजान' के द्वारा
    October 11, 2012

    नहीं माननीय….ये आप क्या कह रहे हैं !! आप जैसे महानुभाव ही मुझ जैसे नवागंतुकों के लिए प्रेरणा-पुंज हैं….बस भगवान से यही प्रार्थना है कि आप हमेशा हम सबको यूँ ही अपनी कल्पना एवं कलम की रसधारा से अभिभूत करते रहें । :)

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 8, 2012

आदरणीय राजीव जी, सादर अभिवादन आप मेरे लिए ख़ास हैं मेरी धड़कन और shwas हैं सजदे में झुकता है सर कहीं lagta है दिल के आस पास हें. बधाई, सर जी.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी,सादर.आपका आशीर्वाद काफी मायने रखता है. सराहना एवं काव्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में दिल में जगह मिली.क्या यह कम है?

omdikshit के द्वारा
October 8, 2012

आदरणीय झा जी, नमस्कार. ये पंक्तियाँ ,जिसके लिए भी हैं,……वह बहुत ही ‘खास’ है,यही तो इनकी ‘खास बात ‘ है.बहुत सुन्दर.

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    October 10, 2012

    आदरणीय ओम जी,सादर.सराहना के लिए आभार. कल्पना की उपज भर है ये कविता.काफी अरसे के बाद मंच से मुखातिब होने पर आपकी प्रतिक्रिया मन को प्रफुल्लित कर गई.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
October 11, 2012

धन्यवाद ! संदीप जी.सम्मान के लिए आभार.फिर भी मुझे लगता है कि आप जैसे युवाओं की रचना को नहीं पढ़ता तो आधुनिक शैली एवं कविताओं,गजलों की रंगीन दुनियां से वाकिफ नहीं हो पाता.


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